Subhash Chandra Bose Documentary in Hindi

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस: जीवन, संघर्ष और मृत्यु का रहस्य - विस्तृत रिपोर्ट

नेताजी सुभाष चंद्र बोस: अनकही कहानी, संघर्ष और मृत्यु का रहस्य

प्रसिद्ध शोधकर्ता और लेखक चंद्रचूर घोष के साथ हुई विस्तृत बातचीत पर आधारित एक गहन विश्लेषण।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का योगदान अद्वितीय है। लेकिन उनका जीवन जितना प्रेरणादायक है, उनकी मृत्यु उतनी ही रहस्यमयी। हाल ही में एक पॉडकास्ट में प्रसिद्ध शोधकर्ता चंद्रचूर घोष ने नेताजी के जीवन, उनके साहसिक कारनामों और उनकी मृत्यु से जुड़े अनसुलझे पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। इस लेख में हम उसी बातचीत के प्रमुख अंशों को विस्तार से जानेंगे।

1. बचपन और प्रारंभिक जीवन: एक विद्रोही का निर्माण

सुभाष चंद्र बोस का जन्म 1897 में कटक के एक संभ्रांत बंगाली परिवार में हुआ था। वह अपने भाई-बहनों में काफी छोटे थे और स्वभाव से शर्मीले थे। 15 साल की उम्र में जब उन्होंने स्वामी विवेकानंद को पढ़ना शुरू किया, तो उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव आया। उन्होंने सीखा कि समाज सेवा और देश सेवा ही जीवन का असली उद्देश्य है।

प्रेसिडेंसी कॉलेज की घटना: कॉलेज के दिनों में अंग्रेज प्रोफेसर ओटेन द्वारा भारतीयों के अपमान के बाद हुए विवाद में, भले ही सुभाष ने हाथ नहीं उठाया था, लेकिन उन्होंने अपने साथियों का नाम बताने के बजाय सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। यह उनके नेतृत्व गुण की पहली झलक थी।

आईसीएस (ICS) से इस्तीफा: पिता के कहने पर वे इंग्लैंड गए और कठिन आईसीएस परीक्षा में चौथी रैंक हासिल की। लेकिन उन्होंने अंग्रेजों की गुलामी करने से मना कर दिया और इस्तीफा देकर देशबंधु चित्तरंजन दास के साथ स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े।

2. गांधी जी के साथ वैचारिक मतभेद

सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी दोनों का लक्ष्य भारत की आजादी था, लेकिन उनके रास्ते अलग थे।

  • पूर्ण स्वराज की मांग: 1928 में जब कांग्रेस डोमिनियन स्टेटस (अधिराज्य) की मांग कर रही थी, तब सुभाष और नेहरू ने पूर्ण स्वराज की मांग की, जिससे गांधीजी नाराज हुए।
  • त्रिपुरी संकट (1939): सुभाष बोस गांधीजी के उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया को हराकर दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष बने। लेकिन गांधीजी ने इसे अपनी "व्यक्तिगत हार" माना। कांग्रेस कार्यकारिणी के असहयोग के कारण अंततः सुभाष को इस्तीफा देना पड़ा।
  • द्वितीय विश्व युद्ध का नजरिया: गांधीजी का मानना था कि अंग्रेजों के मुश्किल वक्त का फायदा उठाना गलत है, जबकि नेताजी का मानना था कि यही भारत की आजादी का "गोल्डन चांस" है।

3. द ग्रेट एस्केप: घर से भागने की रोमांचक कहानी

1940 में नजरबंदी के दौरान नेताजी ने भारत छोड़ने का प्लान बनाया (प्लान बी)। अंग्रेजों का जासूसी तंत्र दुनिया में सबसे मजबूत था, फिर भी नेताजी ने उन्हें चकमा दिया।

वह एक मौलवी (जियाउद्दीन) का भेष बनाकर अपनी कार से गोमो स्टेशन पहुंचे और वहां से पेशावर, काबुल होते हुए जर्मनी पहुंचे। इस यात्रा में उन्हें भगतराम तलवार और उत्तमचंद मल्होत्रा ने मदद की। यह एक ऐसी जासूसी कहानी है जो हकीकत में किसी फिल्म से कम नहीं थी।

4. जर्मनी और जापान के साथ कूटनीति

अक्सर यह सवाल उठता है कि नेताजी जर्मनी क्यों गए? शोध के अनुसार, उनका पहला लक्ष्य सोवियत रूस था, लेकिन वहां से मदद न मिलने पर उन्हें जर्मनी का रुख करना पड़ा।

  • हिटलर से मुलाकात: नेताजी ने हिटलर से साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी आत्मकथा से भारत विरोधी बातें हटा दे। उन्होंने हिटलर की आंखों में आंखें डालकर बात की, न कि एक शरणार्थी की तरह।
  • पनडुब्बी यात्रा: जर्मनी से जापान जाने के लिए उन्होंने दुनिया की सबसे खतरनाक पनडुब्बी यात्रा की। एक जर्मन यू-बोट से रबर की डिंगी के सहारे उन्हें बीच समुद्र में जापानी पनडुब्बी में ट्रांसफर किया गया।

5. आजाद हिंद सरकार और आईएनए (INA)

जापान पहुंचकर उन्होंने बिखर चुकी 'आजाद हिंद फौज' (INA) को पुनर्जीवित किया। उन्होंने न केवल फौज बनाई बल्कि 'आजाद हिंद सरकार' का गठन भी किया, जिसे 9 देशों ने मान्यता दी थी।

उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को जापान से वापस लिया और वहां भारत का झंडा फहराया। शोधकर्ता के अनुसार, जापान भारत पर कब्जा नहीं करना चाहता था, बल्कि उनका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य को कमजोर करना था। नेताजी ने जापान से "बराबरी" (Equal Allies) के दर्जे पर समझौता किया था।

6. क्या नेताजी की मृत्यु प्लेन क्रैश में हुई? (सबसे बड़ा रहस्य)

सरकारी रिकॉर्ड और जापानी घोषणा के अनुसार, 18 अगस्त 1945 को ताइवान (ताइहोकू) में एक प्लेन क्रैश में नेताजी की मृत्यु हो गई। लेकिन चंद्रचूर घोष और 'मिशन नेताजी' की रिसर्च इसे पूरी तरह खारिज करती है।

प्लेन क्रैश थ्योरी में विरोधाभास:

  • डेथ सर्टिफिकेट: डॉक्टर ने जिस नाम से डेथ सर्टिफिकेट बनाया वह "इचिरो ओकुरा" था, न कि चंद्र बोस। शमशान के रिकॉर्ड में भी बोस का नाम नहीं है।
  • गवाहों के बयान: ताइवान के डॉक्टर्स और चश्मदीदों के बयानों में भारी अंतर है। कोई कहता है कि वह अस्पताल में मरे, कोई कहता है क्रैश साइट पर।
  • खुफिया रिपोर्ट्स: ब्रिटिश इंटेलिजेंस की 1946 की रिपोर्ट्स में जिक्र है कि बोस रूस में हो सकते हैं। गांधीजी ने भी शुरुआत में उनकी मृत्यु पर विश्वास नहीं किया था।

7. गुमनामी बाबा का रहस्य

शोधकर्ता का दावा है कि नेताजी प्लेन क्रैश में नहीं मरे, बल्कि वे रूस होते हुए बाद में भारत लौटे और उत्तर प्रदेश में "गुमनामी बाबा" के रूप में रहे।

सबूत क्या हैं?

  • हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स: अमेरिका और भारत के शीर्ष हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स ने पुष्टि की है कि नेताजी और गुमनामी बाबा की लिखावट एक ही व्यक्ति की है।
  • सामान: बाबा के पास से नेताजी के परिवार की तस्वीरें, गोल चश्मा, और महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले।
  • डीएनए विवाद: मुखर्जी कमिशन के दौरान हुए डीएनए टेस्ट में कहा गया कि मैच नहीं हुआ, लेकिन बाद में पता चला कि इलेक्ट्रोफेरोग्राम (कच्चा डेटा) रिपोर्ट्स में हेराफेरी की गई थी या उसे छुपाया गया था। शोधकर्ताओं का आरोप है कि यह एक "कवर-अप" था।

निष्कर्ष

चंद्रचूर घोष के शोध से यह स्पष्ट होता है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस सिर्फ एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी राजनेता थे जिन्होंने विश्व शक्तियों के साथ आंख में आंख मिलाकर बात की। उनकी मृत्यु का रहस्य आज भी सरकारी फाइलों में दबा है। जरूरत है कि सभी खुफिया फाइलों (खासकर इंटेलिजेंस ब्यूरो की) को सार्वजनिक किया जाए ताकि देश अपने सबसे बड़े नायक की सच्चाई जान सके।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: क्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु सच में 1945 के प्लेन क्रैश में हुई थी?

उत्तर: कई जांच आयोगों (विशेषकर मुखर्जी आयोग) और स्वतंत्र शोधकर्ताओं के अनुसार, प्लेन क्रैश की कहानी एक सोची-समझी साजिश (Hoax) थी ताकि नेताजी सुरक्षित रूप से रूस जा सकें। ताइवान सरकार के पास उस दिन किसी प्लेन क्रैश का पुख्ता रिकॉर्ड नहीं मिला है और न ही उनका असली डेथ सर्टिफिकेट मौजूद है।

प्रश्न: गुमनामी बाबा कौन थे और उनका नेताजी से क्या संबंध है?

उत्तर: गुमनामी बाबा एक साधु थे जो उत्तर प्रदेश के फैजाबाद और अन्य इलाकों में रहे। उनके पास से मिली वस्तुओं, हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स की रिपोर्ट्स और चश्मदीदों (जिन्होंने नेताजी को देखा था) के अनुसार, बहुत प्रबल संभावना है कि गुमनामी बाबा ही वेश बदलकर रह रहे नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे।

प्रश्न: नेताजी ने कांग्रेस क्यों छोड़ी थी?

उत्तर: महात्मा गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ वैचारिक मतभेद के कारण। नेताजी चाहते थे कि अंग्रेजों के खिलाफ तुरंत और उग्र आंदोलन किया जाए (विशेषकर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान), जबकि गांधीजी इसके खिलाफ थे। 1939 में चुने जाने के बाद भी उन्हें सहयोग नहीं मिला, इसलिए उन्होंने इस्तीफा दे दिया और 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की स्थापना की।

प्रश्न: जस्टिस मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट को सरकार ने क्यों खारिज किया?

उत्तर: जस्टिस मुखर्जी आयोग ने निष्कर्ष निकाला था कि नेताजी की मृत्यु प्लेन क्रैश में नहीं हुई थी। तत्कालीन सरकार ने बिना कोई ठोस कारण बताए संसद में इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया। शोधकर्ताओं का मानना है कि सच सामने आने से कई राजनीतिक समीकरण और स्थापित नैरेटिव (गांधी-नेहरू नैरेटिव) प्रभावित हो सकते थे।

प्रश्न: क्या नेताजी की शादी हुई थी?

उत्तर: जी हां, उनकी साथी एमिली शेंकल (Emilie Schenkl) थीं, जिनसे उनकी मुलाकात वियना में हुई थी। उनकी एक बेटी भी हैं जिनका नाम अनीता बोस फाफ है। हालांकि, नेताजी ने शादी की बात को सार्वजनिक नहीं किया था क्योंकि उनका पहला प्रेम और प्राथमिकता भारत की आजादी थी।

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Priyanshu Thakur

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